क़यामपुर में अम्बेडकर जयंती पर ऐतिहासिक महारैली


मंदसौर (क़यामपुर), दिनांक 20 अप्रैल 2025
क़यामपुर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जन्मोत्सव समिति के तत्वावधान में संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में एक विशाल महारैली एवं जनसभा का आयोजन किया गया। इस आयोजन में मन्दसौर जिले भर से भारी संख्या में अम्बेडकरवादी अनुयायियों ने सहभागिता कर कार्यक्रम को ऐतिहासिक सफलता प्रदान की।

समस्त अम्बेडकरवादी अनुयायियों की ऐतिहासिक भागीदारी, संविधान व सामाजिक समरसता का संदेश

विधिक आवाज़ समाचार |मंदसौर
पत्रकार: सेराज मंसुरी की रिपोर्ट

रविदास चौक से प्रारंभ हुआ जुलूस, गरिमा और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण

सुबह रविदास चौक, इंद्रा कॉलोनी क़यामपुर से जुलूस की शुरुआत हुई, जो क़स्बे के मुख्य मार्गों—बस स्टैंड, चौपाटी, सदर बाजार, नीम चौक, माली मोहल्ला—से होते हुए हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में संपन्न हुआ। जुलूस में संविधान और सामाजिक न्याय के नारों के साथ जनसमूह ने अनुशासित एवं शांतिपूर्ण रूप से सहभागिता की।


सामाजिक समरसता का प्रतीक, जगह-जगह हुआ स्वागत

रास्ते भर जगह-जगह अम्बेडकर अनुयायियों का स्वागत किया गया। *याराना ग्रुप* द्वारा बस स्टैंड पर शीतल शरबत की व्यवस्था की गई, साथ ही समाज सेवी कय्यूम के के  मित्र मण्डल द्वारा स्वल्पहार स्वरूप पोहे का नाश्ता करवाया गया!वहीं अन्य स्थानों पर नींबू पानी के पाउच, हार-फूल आदि से जुलूस का भव्य स्वागत हुआ। इस सेवा भाव ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।

गैर-राजनीतिक मंच से उठी संविधान रक्षा की बुलंद आवाज़

यह आयोजन पूर्णतः गैर-राजनीतिक रहा। इसमें किसी भी राजनीतिक दल का प्रचार या मंच से संबोधन नहीं किया गया। सिर्फ संविधान के मूल विचारों को मानने वाले लोग ही इस आयोजन में शामिल हुए। हालांकि, आज़ाद समाज पार्टी से जुड़े कई पदाधिकारी भी व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में उपस्थित रहे, लेकिन उन्होंने इसे सामाजिक उद्देश्य की भावना से सहभागिता दी।

भव्य जनसभा और सामूहिक भीम भोज

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जुलूस के समापन के बाद हायर सेकेंडरी स्कूल क़यामपुर में एक जनसभा का आयोजन हुआ, जिसमें वक्ताओं ने डॉ. अम्बेडकर के विचारों, शिक्षा, समानता, और संविधान की महत्ता पर प्रकाश डाला। जनसभा के बाद उपस्थित सभी लोगों के लिए सामूहिक 'भीम भोज' का आयोजन किया गया जिसमें हजारों लोगों ने एक साथ भोजन कर सामाजिक एकता का परिचय दिया।

संक्षेप में
यह आयोजन ना केवल डॉ. अम्बेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बना, बल्कि यह सामाजिक एकता, समरसता और संवैधानिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार का सशक्त उदाहरण भी सिद्ध हुआ। आयोजन की सफलता में समिति के समस्त सदस्यों, युवाओं, महिला शक्ति, और समर्पित स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा।

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