इंदौर: भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जंग में इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने एक अभूतपूर्व और सख्त कदम उठाया है। अब तक केवल घूसखोरों पर नकेल कसने वाली पुलिस ने अब उन 'धोखेबाज' फरियादियों को भी निशाने पर लिया है, जो रिश्वतखोरों को रंगेहाथ पकड़वाने के बाद अदालत में अपने बयानों से मुकर गए। लोकायुक्त ने ऐसे 21 शिकायतकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें कानूनी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
ट्रैप के बाद समझौता करने वालों की अब खैर नहीं
भ्रष्टाचार के मामलों में अक्सर यह देखा गया है कि फरियादी शुरुआत में तो पूरी सक्रियता दिखाते हैं, लेकिन कोर्ट ट्रायल के दौरान वे आरोपियों से साठगांठ कर लेते हैं। लोकायुक्त के पास ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और रंगेहाथ जब्ती जैसे पुख्ता सबूत होने के बावजूद, जब मुख्य गवाह (फरियादी) ही पाला बदल लेता है, तो मामला कमजोर हो जाता है।
- नतीजा: फरियादी के 'पक्षद्रोही' (Hostile) होने के कारण बड़े-बड़े घूसखोर अधिकारी और कर्मचारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं।
12 साल पुराने मामलों की खोली गई फाइलें
लोकायुक्त पुलिस ने पिछले 12 वर्षों के रिकॉर्ड खंगाले और ऐसे 21 मामलों को चिन्हित किया जिनमें गवाहों के पलटने से आरोपी बरी हुए।
- धाराएं: इन सभी 21 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईपीसी की संबंधित धाराओं (340-344) के तहत इश्तगाशा दायर किया गया है।
- सजा का प्रावधान: झूठी गवाही देने और न्यायपालिका को गुमराह करने के आरोप में इन्हें तीन माह की जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
भ्रष्ट अफसरों को मिला था 'गवाहों' का कवच
इन मुकदमों में पटवारी, पुलिसकर्मी, उपयंत्री और कई विभागों के अधिकारी शामिल थे, जिन्हें लोकायुक्त ने रिश्वत लेते पकड़ा था। आरोपियों ने अपने प्रभाव या लालच का इस्तेमाल कर फरियादियों का मन बदल दिया था। लेकिन अब लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मज़ाक बनाने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा।
लोकायुक्त एसपी का सख्त संदेश
लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय के मुताबिक, "गवाहों के मुकरने की प्रवृत्ति से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को ठेस पहुँचती है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और न्याय की गरिमा बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।"
