नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जहाँ चिकित्सा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला दी है, वहीं इसका एक डरावना पहलू भी सामने आ रहा है। वर्तमान में AI का दुरुपयोग महिलाओं के खिलाफ 'डिजिटल हिंसा' के लिए एक खतरनाक हथियार के रूप में किया जा रहा है। हाल ही में देशभर से ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें बिना सहमति के महिलाओं की तस्वीरों और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है।
डीपफेक का शिकार: सेलिब्रिटी से लेकर आम महिलाएं तक
AI के जरिए फर्जी वीडियो और फोटो बनाने की तकनीक, जिसे 'डीपफेक' कहा जाता है, महिलाओं की गरिमा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है।
- केस स्टडी: मराठी अभिनेत्री गिरिजा ओक का मामला इसका ताजा उदाहरण है, जहाँ AI का उपयोग कर उनकी आपत्तिजनक फर्जी तस्वीरें और वीडियो बनाए गए। यह केवल मशहूर हस्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लड़कियां और महिलाएं भी इस पहचान की चोरी और छेड़छाड़ का शिकार हो रही हैं।
ऑनलाइन हिंसा का बदलता स्वरूप
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI ने डिजिटल अपराधों को पहले से कहीं अधिक आसान और व्यापक बना दिया है।
- तेजी से फैलाव: अब फर्जी जानकारी और छेड़छाड़ किए गए कंटेंट को चंद सेकंडों में तैयार कर लाखों लोगों तक पहुँचाया जा सकता है।
- मानसिक आघात: इस तरह की हिंसा न केवल महिलाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करती है, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति और व्यक्तिगत सुरक्षा पर भी गहरा प्रहार करती है। कई मामलों में यह डिजिटल उत्पीड़न वास्तविक जीवन के खतरों (Physical Threat) में भी बदल जाता है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
विभिन्न शोधों में यह बात सामने आई है कि इंटरनेट पर मौजूद 'बिना सहमति' (Non-consensual) के बनाए गए डीपफेक कंटेंट में 90% से अधिक पीड़ित महिलाएं होती हैं। AI टूल्स का उपयोग अब ब्लैकमेलिंग, ऑनलाइन स्टॉकिंग (पीछा करना) और पहचान की नकल करने जैसे अपराधों में धड़ल्ले से हो रहा है, जिससे डिजिटल स्पेस महिलाओं के लिए असुरक्षित होता जा रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: लोकतंत्र और समाज पर खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को सार्वजनिक जीवन और ऑनलाइन चर्चाओं से दूर करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा भी हो सकती है।
- समाधान की मांग: रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकारों और टेक कंपनियों को सख्त कानून और 'AI रेगुलेशन सिस्टम' बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
- जिम्मेदारी: समाज को भी जागरूक होना होगा ताकि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ हो और महिलाओं की सुरक्षा को हर हाल में प्राथमिकता दी जाए।
