इंदौर में फायर सेफ्टी पर 'प्रशासनिक प्रहार': 13 से अधिक कोचिंग और व्यावसायिक संस्थान सील, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कार्रवाई


इंदौर। लखनऊ अग्निकांड की त्रासदी के बाद इंदौर प्रशासन पूरी तरह 'एक्शन मोड' में है। शहर में विद्यार्थियों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कलेक्टर श्री शिवम वर्मा के निर्देश पर प्रशासनिक टीम ने भंवरकुआं और गीता भवन क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने वाले 13 से अधिक बड़े संस्थानों को मौके पर ही सील कर दिया गया।

सुरक्षा से खिलवाड़: 'सील' हुए प्रमुख संस्थान
एसडीएम श्री घनश्याम धनगर के नेतृत्व में की गई इस संयुक्त कार्रवाई में उन संस्थानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें पहले नोटिस दिए गए थे, लेकिन उन्होंने सुरक्षा सुधारों को नजरअंदाज किया। कार्रवाई की चपेट में आए प्रमुख संस्थानों में शामिल हैं:
  • कोचिंग संस्थान: कैटेलाइजर, रेज़ोनेंस, रामानुजन कोचिंग, मेडिकोज करियर इंस्टीट्यूट, स्टडी आईएएस, माईंड कोचिंग क्लासेस, उड़ान करियर इंस्टीट्यूट, अड्डा, विनायक, स्टडी आईक्यू, ईरा लाइब्रेरी, गुरुकुल क्लासेस, श्री जी लाइब्रेरी, सारथी लाइब्रेरी, नुकलियम, आयाम और इकरथ कोचिंग संस्थान।
  • अन्य: माखनवाला रसोई रेस्टोरेंट और बेसमेंट में संचालित एक अवैध ऑटो सेंटर।
कार्रवाई के मुख्य कारण
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक दल ने गंभीर अनियमितताएं पाईं:
  • उपकरणों का अभाव: अधिकांश संस्थानों में अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers) तक मौजूद नहीं थे।
  • नोटिस की अनदेखी: इन संस्थानों को तीन माह पूर्व चेतावनी दी गई थी, लेकिन मानकों का पालन नहीं किया गया।
  • जोखिम भरा वातावरण: माखनवाला रसोई में जलती भट्टी के पास कोयले का भंडारण मिला, जो किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता था।
  • जर्जर भवन: मेडिकोज करियर इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों में भवन की स्थिति भी अत्यंत जर्जर पाई गई।
कलेक्टर की दो-टूक: "लापरवाही बर्दाश्त नहीं"
कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार यह अभियान जारी रहेगा। अब तक शहर में सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले 70 से अधिक भवनों को सील किया जा चुका है। उन्होंने भवन संचालकों को चेतावनी दी है कि वे तत्काल मानक स्तर की फायर सेफ्टी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

संयुक्त टीम की बड़ी भूमिका
यह कार्रवाई राजस्व विभाग, फायर सेफ्टी ऑफिसर और नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा की गई। इसमें तहसीलदार श्री राकेश सस्तिया, श्री कमलेश कुशवाह, नायब तहसीलदार श्री अशोक परमार और भवन अधिकारी श्री अंकेश बिरथरे सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

प्रशासन का यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि विद्यार्थियों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को अब बख्शा नहीं जाएगा। आगामी दिनों में शहर भर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों और हॉस्टल्स की भी सघन जांच की जाएगी।
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