खंडवा/बुरहानपुर। जंगलों को बचाने और अवैध अतिक्रमण को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से कोरकू समाज ने एक ऐतिहासिक पहल की है। रविवार को खंडवा और बुरहानपुर जिले के हजारों कोरकू समाज के नागरिक और वन सुरक्षा समिति के सदस्य एकजुट हुए और मुख्यमंत्री के नाम सिटी मजिस्ट्रेट श्री बजरंग बहादुर सिंह को ज्ञापन सौंपा।
"तीर-गोफन उठाएंगे, जंगल हम बचाएंगे"
स्टेडियम ग्राउंड पर एकत्रित हुए हजारों वनवासियों ने पारंपरिक जोश के साथ प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग है कि वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए वन विभाग द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहनी चाहिए।
कोरकू समाज की प्रमुख मांगें:
- निरंतर कार्रवाई: भिलायीखेड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा की गई अतिक्रमण-विरोधी कार्रवाई का समाज ने पूर्ण समर्थन किया है। समाज ने मांग की कि भविष्य में भी बिना किसी दबाव के यह कार्रवाई जारी रहे।
- अतिक्रमण-रोधी सुरक्षा: अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि पर पुनः कब्जा रोकने के लिए गश्त, चौकी, ट्रेंच, वॉच टॉवर और व्यापक पौधरोपण जैसे स्थायी उपाय किए जाएं।
- सुरक्षा और कानूनी सख्ती: वन कर्मियों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, वन विभाग के कार्यों में बाधा डालने और हमला करने वाले दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
- राज्य स्तरीय अभियान: वनों की सुरक्षा को शासन और समाज की साझा जिम्मेदारी बताते हुए, इस दिशा में एक विशेष राज्य स्तरीय अभियान संचालित करने का आग्रह किया गया।
"जंगल केवल भूमि नहीं, हमारी पहचान है"
कोरकू समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनकी संस्कृति, परंपराएं और आजीविका सदियों से वनों पर आधारित हैं। जलाऊ लकड़ी से लेकर महुआ, चिरौंजी, गोंद, तेंदूपत्ता और औषधीय वनोपज तक, उनकी दैनिक आवश्यकताओं का आधार जंगल ही हैं। प्रतिनिधियों ने चिंता जताई कि अवैध अतिक्रमणों के कारण न केवल जंगलों का क्षेत्रफल घटा है, बल्कि वन्य जीवों के आवास भी नष्ट हो रहे हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर संकट है।
प्रशासन से सहयोग की अपील
समाज ने वन संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों और सहयोगी ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने की भी मांग की है। कोरकू समाज के इस कदम को पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।
