मध्यप्रदेश में संभावित अल्प वर्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार की 'ब्लूप्रिंट' तैयार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए निर्देश


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में विभिन्न विभागों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली और स्पष्ट किया कि इसे चुनौती के बजाय बेहतर योजना और वैज्ञानिक खेती के अवसर के रूप में लिया जाए।

'कम पानी, अधिक उत्पादन' पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विभागों को निर्देश दिए कि किसानों को मौसम की चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक रूप से तैयार किया जाए:
  • फसल चयन: किसानों को कम पानी और कम अवधि वाली फसलों के लिए जागरूक किया जाए। विशेष रूप से ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर और कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज (श्रीअन्न) एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर बल दिया गया।
  • वैज्ञानिक बुआई: किसानों को जल्दबाजी में बुआई न करने, खेतों में पर्याप्त नमी आने पर ही बुआई करने और नमी संरक्षण की तकनीकें अपनाने की सलाह दी गई है।
  • विस्तार तंत्र: कृषि वैज्ञानिकों के सुझावों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुँचाने के लिए कृषि विस्तार तंत्र को सक्रिय किया गया है।
अगले 2 वर्षों के लिए व्यापक कार्ययोजना
सरकार ने अल्प और दीर्घकालिक तैयारियों के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है:
  • जल संरचनाओं का कायाकल्प: 'जलाभिषेक 2.0' के अंतर्गत प्रदेश में कुओं, बावड़ियों और पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। हर विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य है।
  • जल जीवन मिशन: ग्रामीण क्षेत्रों में 90 दिवसीय विशेष अभियान चलाकर बंद/अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत की जाएगी।
  • जल संरक्षण: 'खेत का पानी, खेत में' और 'गांव का पानी, गांव में' सिद्धांत पर रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम और खेत-तालाबों का निर्माण मिशन मोड में होगा।
  • प्राथमिकता प्रोटोकॉल: जलाशयों (इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर आदि) के प्रबंधन में स्पष्ट प्राथमिकता तय की गई है—पहला स्थान पेयजल, दूसरा सिंचाई और तीसरा विद्युत उत्पादन का होगा।
आकस्मिक स्थिति के लिए विशेष इंतजाम
  • डिजिटल मॉनिटरिंग: राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जाएगी।
  • क्षति आंकलन: डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से फसल क्षति का आंकलन किया जाएगा, ताकि सर्वे 15 दिनों के भीतर पूरा हो सके।
  • तकनीकी सहायता: किसानों को मौसम के पूर्वानुमान और फसल संबंधी सलाह मोबाइल संदेशों के जरिए निरंतर दी जा रही है।
  • कलेक्टर की निगरानी: हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट आकस्मिक योजना तैयार की जा रही है और नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों का हित राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उनकी समृद्धि के लिए सरकार हर संभव प्रशासनिक व तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करेगी। बैठक में राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
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