धधकते जंगल: भारत के 12 राज्यों में वनाग्नि का तांडव, मध्य प्रदेश में हालात सबसे चिंताजनक


नई दिल्ली: देश में बढ़ते पारे और भीषण लू ने न केवल जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि भारत की 'हरी संपदा' को भी संकट में डाल दिया है। सैटेलाइट से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य और दक्षिण भारत के जंगलों में आग ने विकराल रूप ले लिया है। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) की रिपोर्ट चेतावनी दे रही है कि देश के एक दर्जन से अधिक राज्यों के जंगल इस समय आग की चपेट में हैं।

मध्य प्रदेश बना 'हॉटस्पॉट'

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वनाग्नि का सबसे भयानक मंजर मध्य प्रदेश में है, जहाँ पिछले कुछ दिनों के भीतर ही 600 से अधिक बड़ी आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं। मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी आग ने भारी तबाही मचाई है।

  • प्रभावित राज्य: उत्तर में उत्तराखंड से लेकर पूर्वोत्तर में असम और मणिपुर तक, और दक्षिण में आंध्र प्रदेश तक की वन संपदा खाक हो रही है।
  • उत्तराखंड की स्थिति: पहाड़ों में आग ने लगभग 130 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे पर्यटन केंद्रों पर भी धुंध और गर्मी का असर बढ़ गया है।

तीन दिनों तक लगातार जलती रही आग

चिंता की बात यह है कि कई क्षेत्रों में आग पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों पर जंगल 72 घंटों से अधिक समय तक लगातार जलते रहे। यह न केवल पेड़ों को राख कर रहा है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और स्थानीय जलवायु को भी नुकसान पहुँचा रहा है।

वन्यजीव और पारिस्थितिकी पर प्रहार

यह आग केवल वनस्पतियों का विनाश नहीं है, बल्कि यह बेजुबान जानवरों के लिए काल बन रही है।

  1. आवास का विनाश: जानवरों के प्राकृतिक घर नष्ट हो रहे हैं, जिससे वे रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं।
  2. इकोसिस्टम का असंतुलन: जैव विविधता को होने वाला यह नुकसान लंबे समय तक पर्यावरण के लिए घातक सिद्ध होगा।

क्यों सुलग रहे हैं जंगल?

पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस संकट के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं:

  • अत्यधिक गर्मी: असामान्य रूप से बढ़ता तापमान और लू।
  • सूखा कचरा: जंगलों में जमा सूखी पत्तियां और लकड़ियां जो ईधन का काम करती हैं।
  • मानवीय हस्तक्षेप: इंसानी लापरवाही भी कई बार बड़ी आग की वजह बनती है।
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