धार्मिक डेस्क: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 का ज्येष्ठ मास भक्तों के लिए बेहद फलदायी और दुर्लभ होने वाला है। इस बार ज्येष्ठ महीने में हनुमान जी की उपासना के लिए चार नहीं, बल्कि पूरे आठ 'बड़ा मंगल' का अद्भुत संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसा दुर्लभ अवसर करीब 19 साल बाद आया है।
19 साल बाद क्यों बना यह महासंयोग?
शिव-शनि हनुमान मंदिर के पुजारी पं. बालकृष्ण शास्त्री के मुताबिक, इस वर्ष ज्येष्ठ मास में 'अधिक मास' (मलमास) का प्रभाव रहेगा। इस कारण यह महीना सामान्य 30 दिनों के बजाय लगभग 59 दिनों का होगा।
- अवधि: ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा।
- पिछला रिकॉर्ड: इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 2007 में देखा गया था।
क्या है अधिक मास का विज्ञान?
हिंदू पंचांग में चंद्र वर्ष (354 दिन) और सौर वर्ष (365 दिन) के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे 'पुरुषोत्तम मास' या 'अधिक मास' कहते हैं। हालांकि इस दौरान मांगलिक कार्य जैसे विवाह या गृह प्रवेश वर्जित होते हैं, लेकिन भक्ति और साधना के लिए इसे सर्वोत्तम माना जाता है।
8 'बड़ा मंगल' की पूरी लिस्ट (Schedule)
इस पावन महीने में बजरंगबली की विशेष कृपा पाने के लिए इन तारीखों को नोट कर लें:
| क्रम | बड़ा मंगल की तिथि |
| पहला | 5 मई |
| दूसरा | 12 मई |
| तीसरा | 19 मई |
| चौथा | 26 मई |
| पांचवां | 2 जून |
| छठा | 9 जून |
| सातवां | 16 जून |
| आठवां | 23 जून |
बजरंगबली की पूजा का महत्व
ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हनुमान जी के 'वृद्ध स्वरूप' यानी बुढ़वा मंगल की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार:
- इन आठों मंगलवारों पर दान-पुण्य और भंडारे के आयोजन से कुंडली के दोष शांत होते हैं।
- हनुमान जी की विशेष आराधना से आर्थिक और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- ज्योतिषविदों का मानना है कि इस दुर्लभ संयोग में की गई साधना का फल कई गुना अधिक प्राप्त होगा।
