उज्जैन: मालवा क्षेत्र के किसानों के लिए इस साल सोयाबीन 'पीला सोना' साबित हो रही है। पिछले कुछ महीनों में कीमतों में आए उछाल ने किसानों और कारोबारियों दोनों को बड़ी राहत दी है। उज्जैन मंडी में शनिवार को नीलामी के दौरान बीज गुणवत्ता वाले सोयाबीन के भाव 7000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गए, जो इस सीजन का एक बड़ा रिकॉर्ड है।
तीन महीने में ₹2000 की बड़ी उछाल
सोयाबीन के बाजार में पिछले तीन महीनों के दौरान जबरदस्त तेज़ी देखी गई है। सीजन की शुरुआत में जहाँ भाव 4500 रुपये के आसपास थे, वहीं अब इसमें 2000 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है।
- वर्तमान स्थिति: सामान्य सोयाबीन इन दिनों 6500 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा है।
- बीज की मांग: बुवाई के लिए उपयुक्त उच्च गुणवत्ता वाले सोयाबीन की मांग इतनी अधिक है कि इसके भाव 7000 रुपये तक जा पहुँचे हैं।
स्टॉक और सरकारी समर्थन ने बदली तस्वीर
पिछले दो-तीन साल सोयाबीन उत्पादकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे थे। कम भाव के कारण किसानों और व्यापारियों के पास पुराना स्टॉक जमा हो गया था, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई थी। लेकिन इस साल स्थिति पूरी तरह बदल गई है:
- भावांतर योजना का लाभ: जब सीजन में भाव 4200-4500 रुपये थे, तब सरकार ने किसानों को प्रति क्विंटल 1000 से 1500 रुपये की भावांतर राशि देकर आर्थिक नुकसान से बचाया।
- अंतरराष्ट्रीय मांग: वैश्विक बाजार में सोया खली (Soya Meal) की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतों को लगातार सहारा मिल रहा है।
क्या कीमतों की तेज़ी पर लगेगा ब्रेक?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोयाबीन के दामों में अब स्थिरता आ सकती है या मामूली गिरावट देखी जा सकती है। इसके पीछे मुख्य वजह महाराष्ट्र और गुजरात सरकार का रुख है।
- समर्थन मूल्य पर खरीदी: दोनों राज्यों की सरकारों ने सीजन के दौरान किसानों से भारी मात्रा में सोयाबीन खरीदा था। अब सरकारें इस स्टॉक को खुले बाजार में बेचने की तैयारी कर रही हैं।
- टेंडर प्रक्रिया: महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में बिक्री के लिए टेंडर जारी किए थे, हालांकि उचित दाम न मिलने पर उन्हें रद्द कर दिया गया था। यदि सरकारी स्टॉक बाजार में आता है, तो आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में तेज़ी रुक सकती है।
