गेहूं कालाबाजारी मामला: एमपी स्टेट सप्लाई कॉर्पोरेशन के पूर्व प्रबंधक को हाईकोर्ट से झटका


जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकारी गेहूं की हेराफेरी से जुड़े एक गंभीर मामले में राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के पूर्व जिला प्रबंधक रवि सिंह को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने रवि सिंह द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा खुद को अतिरिक्त आरोपी बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत आने वाले खाद्यान्न के गबन और अवैध परिवहन से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार:

  • 9 नवंबर 2014 को सरकारी उचित मूल्य दुकान (नंबर 398) के लिए करीब 50.63 क्विंटल गेहूं (100 बोरियां) जारी किया गया था।
  • जांच के दौरान यह खेप अपने निर्धारित केंद्र पर पहुंचने के बजाय किसी दूसरे और असंबद्ध स्थान पर पाई गई।
  • आरोप है कि गेहूं की इस अवैध आवाजाही को वैध दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे, जबकि विभाग द्वारा ऐसा कोई आधिकारिक चालान या आदेश जारी ही नहीं हुआ था।

निचली अदालत का फैसला बरकरार

रवि सिंह उस समय निगम में जिला प्रबंधक के पद पर थे और पूरे वितरण तंत्र की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं की थी। हालांकि, शुरुआत में दाखिल चार्जशीट में उनका नाम बतौर आरोपी नहीं था, लेकिन ट्रायल के दौरान गवाहों के बयानों और नए साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत ने उन्हें अतिरिक्त आरोपी मानते हुए समन जारी किया था।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों के गहन विश्लेषण पर आधारित है। कोर्ट ने माना कि उपलब्ध सामग्री याचिकाकर्ता की अपराध में संलिप्तता की ओर पर्याप्त संकेत करती है। इस टिप्पणी के साथ ही उच्च न्यायालय ने पूर्व प्रबंधक की याचिका को आधारहीन मानते हुए निरस्त कर दिया।

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