कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की आहट सुनाई दे रही है। राज्य विधानसभा की अवधि पूरी होने के साथ ही राज्यपाल आर.एन. रवि ने मौजूदा मंत्रिमंडल को भंग करने का बड़ा संवैधानिक निर्णय लिया है। इस कदम के साथ ही ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री के रूप में वर्तमान कार्यकाल आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई
7 मई को राजभवन द्वारा जारी एक विशेष अधिसूचना के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी गई। राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) में निहित अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए विधानसभा को भंग करने का आदेश दिया। 'कोलकाता गजट' में प्रकाशित इस राजपत्रित आदेश की पुष्टि मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला के हस्ताक्षरों से हुई है। इस घटनाक्रम ने राज्य में तृणमूल कांग्रेस के पिछले डेढ़ दशक के निर्बाध शासन पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
तनावपूर्ण रहा सत्ता परिवर्तन का घटनाक्रम
कैबिनेट भंग होने की इस प्रक्रिया के पीछे भारी राजनीतिक गहमागहमी की खबरें भी सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा स्वेच्छा से पद छोड़ने को लेकर कुछ मतभेद थे। अंततः, संवैधानिक गतिरोध को दूर करने के लिए राज्यपाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरी विधानसभा और मंत्रिमंडल को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी।
एक युग का अंत?
ममता बनर्जी ने साल 2011 में बंगाल की सत्ता संभाली थी और वह लगातार तीन बार मुख्यमंत्री चुनी गईं। उनके 15 वर्षों के इस लंबे सफर को जहां जनहित की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए जाना जाता है, वहीं वह अक्सर अपने तीखे राजनीतिक रुख और विवादों के कारण भी चर्चा में रहीं।
अब क्या होगा? विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में नई प्रशासनिक व्यवस्था की तैयारी शुरू होगी। आगामी चुनाव और नई सरकार के गठन तक की प्रक्रिया को लेकर अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग और राजभवन की अगली रणनीतियों पर टिकी हैं।