भोपाल। वाहन चोरी के मामले में 'लापरवाही' का हवाला देकर बीमा राशि देने से मना करना एक इंश्योरेंस कंपनी के लिए मुसीबत बन गया। भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (क्रमांक-1) ने कंपनी के तर्क को अनुचित मानते हुए उसे कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने कंपनी को न केवल बीमा राशि का भुगतान करने, बल्कि उपभोक्ता को मानसिक परेशानी के लिए हर्जाना देने का भी निर्देश दिया है।
क्या था विवाद?
मामला करोंद निवासी मुसीफ अहमद से जुड़ा है। उन्होंने एक नीलामी के जरिए चार पहिया वाहन खरीदा था, जिसकी मूल चाबियां उपलब्ध नहीं थीं और केवल डुप्लीकेट चाबी ही उनके पास थी। उपभोक्ता ने 'इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस' से वाहन का दो लाख रुपये का बीमा कराया था। कुछ समय बाद वाहन चोरी हो गया, लेकिन जब उन्होंने दावे (Claim) के लिए आवेदन किया, तो कंपनी ने उसे खारिज कर दिया।
बीमा कंपनी के तर्क
कंपनी ने अपना बचाव करते हुए निम्नलिखित दलीलें दी थीं:
- वाहन की खरीद कीमत (54 हजार रुपये) और बीमा राशि (2 लाख रुपये) में बड़ा अंतर है।
- उपभोक्ता ने चाबी गाड़ी में ही छोड़ दी थी, जो चोरी के लिए जिम्मेदार 'घोर लापरवाही' है।
- वाहन को लावारिस हालत में छोड़ दिया गया था।
आयोग का फैसला: 'उचित आधार के बिना दावा खारिज नहीं हो सकता'
उपभोक्ता द्वारा फरवरी 2021 में दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय की पीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। आयोग ने माना कि वाहन की मरम्मत और उसके सुधार पर किए गए निवेश को देखते हुए उपभोक्ता बीमा राशि का पूर्ण हकदार है।
आयोग के प्रमुख निर्देश:
- बीमा राशि: कंपनी उपभोक्ता को 2 लाख रुपये की पूरी बीमा राशि प्रदान करे।
- हर्जाना: मानसिक प्रताड़ना और परेशानी के एवज में 8 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाए।
