भारत के कई हिस्सों में गर्मी हर साल पुराने रिकॉर्ड तोड़ रही है और पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि इंसानी शरीर अधिकतम कितनी गर्मी झेल सकता है और किस स्थिति में पहुंचकर हमारे अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं।
बाहरी पारे से ज्यादा खतरनाक है अंदरूनी तापमान
गर्मी का जानलेवा होना सिर्फ धूप पर नहीं, बल्कि हवा की नमी (उमस) और शरीर के अंदरूनी तापमान पर निर्भर करता है।
- शरीर का कूलिंग सिस्टम: मानव शरीर का सामान्य अंदरूनी तापमान लगभग 37°C होता है। हमारा शरीर पसीना बहाकर खुद को ठंडा रखता है।
- उमस का खतरा: जब हवा में नमी (Humidity) बहुत बढ़ जाती है, तो पसीना सूख नहीं पाता। ऐसे में शरीर का नेचुरल 'कूलिंग सिस्टम' फेल हो जाता है और हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
40°C अंदरूनी तापमान: एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी
अक्सर लोग 45°C या 50°C के बाहरी तापमान को ही खतरा मानते हैं, लेकिन असली आपातकाल तब शुरू होता है जब शरीर का अंदरूनी तापमान 40°C या उससे अधिक हो जाता है। इस स्तर पर पहुंचते ही दिमाग, दिल, किडनी और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर जानलेवा दबाव पड़ने लगता है।
इन गंभीर लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
शरीर का तापमान अनियंत्रित होने पर निम्नलिखित चेतावनी भरे संकेत मिलते हैं:
- अचानक चक्कर आना, सिर घूमना या मानसिक संतुलन बिगड़ना।
- दिल की धड़कन (Pulse Rate) का बहुत तेज हो जाना।
- जी मिचलाना, उल्टी होना या सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ।
- अचानक बेहोशी छा जाना।
दिमाग पर सीधा असर:
हीटस्ट्रोक की स्थिति में सबसे पहले हमारा मस्तिष्क प्रभावित होता है। इससे मरीज को भ्रम (Confusion) होने लगता है, दौरे पड़ सकते हैं या वह कोमा में जा सकता है। समय पर इलाज न मिलने से मल्टी-ऑर्गन फेलियर (सभी अंगों का बंद होना) के कारण मौत भी हो सकती है।
हाई रिस्क जोन: इन्हें है सबसे ज्यादा खतरा
- धूप में काम करने वाले: मजदूर, ट्रैफिक पुलिसकर्मी और डिलीवरी बॉय।
- कमजोर इम्युनिटी: बुजुर्ग और छोटे बच्चे, जिनका आंतरिक तापमान नियंत्रित करने का तंत्र कमजोर होता है।
- गंभीर बीमारियों से पीड़ित: दिल, किडनी या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोग।
हीटस्ट्रोक से बचाव के अचूक उपाय
- भरपूर लिक्विड डाइट: शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए खूब पानी, ओआरएस (ORS) घोल, नींबू पानी या छाछ का सेवन करें।
- पीक ऑवर्स में सावधानी: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें।
- सही कपड़ों का चुनाव: हल्के रंग के, ढीले-ढाले और सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनें।
