ग्वालियर: अंचल के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, जयारोग्य अस्पताल (JAH) की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं अब मरीजों की जान पर भारी पड़ने लगी हैं। अस्पताल के आकस्मिक चिकित्सा केंद्र (इमरजेंसी) से लेकर ट्रामा सेंटर तक, हर जगह मरीजों को इलाज की एक पर्ची के लिए भी घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीज और उनके तीमारदार डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के आगे मिन्नतें करने को मजबूर हैं।
अस्पताल की बदहाली को बयां करती कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
केस 1: पेट दर्द से तड़पते मरीज को आधे घंटे का इंतजार
बुधवार को डबरा के रहने वाले रवि को पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद जेएएच रेफर किया गया था। इमरजेंसी में शुरुआती जांच के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया और कहा गया कि सर्जरी विभाग के डॉक्टर आकर उसे देखेंगे। इस आश्वासन के बाद भी रवि को इलाज शुरू होने के लिए आधे घंटे से अधिक समय तक स्ट्रेचर पर तड़पना पड़ा।
केस 2: ट्रामा सेंटर में घायल की 24 घंटे तक नहीं हुई ड्रेसिंग
शिवपुरी के पिछोर में मारपीट के दौरान घायल हुए दिनेश पाल को पुलिस इलाज के लिए ट्रामा सेंटर लेकर आई थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के पूरे एक दिन बाद तक दिनेश की मरहम-पट्टी (ड्रेसिंग) तक नहीं की गई। दर्द से बेहाल दिनेश को राहत न मिलती देख, उसका भाई मजबूरी में उसे अस्पताल से वापस घर ले गया।
केस 3: बुजुर्ग की मौत पर परिजनों का फूटा गुस्सा, लगाया लापरवाही का आरोप
सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए 70 वर्षीय बुजुर्ग ओमप्रकाश शाक्य की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने ट्रामा सेंटर में जमकर हंगामा काटा। मृतक के बेटे फूलसिंह ने आरोप लगाया कि:
"मेरे पिता पिछले चार दिनों से यहाँ भर्ती थे, लेकिन किसी भी सीनियर डॉक्टर ने आकर उनकी सुध नहीं ली। पूरा इलाज केवल जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दिया गया था।" हंगामे की स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस को भी बुलाना पड़ा।
प्रबंधन का पक्ष: आरोपों को बताया बेबुनियाद
अस्पताल में मचे इस घमासान और अव्यवस्थाओं पर प्रबंधन ने सफाई दी है। ट्रामा सेंटर व इमरजेंसी के नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र अग्रवाल का कहना है:
- सीनियर डॉक्टरों पर आरोप गलत: बुजुर्ग मरीज की मौत के मामले में सीनियर डॉक्टरों द्वारा न देखे जाने का आरोप पूरी तरह गलत है। वरिष्ठ चिकित्सकों ने मरीज की जांच की थी और इसके प्रमाण केसशीट पर दर्ज उनके नोट्स में मौजूद हैं।
- कमियों को करेंगे दुरुस्त: हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि इमरजेंसी वार्ड में संबंधित विभागों के सीनियर रेजिडेंट (SR) डॉक्टरों के न मिलने की शिकायतें आई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी को ड्यूटी पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं।
