नीमच। जल संरक्षण की दिशा में नीमच जिला प्रशासन ने जनसहयोग के माध्यम से एक मिसाल कायम की है। कलेक्टर श्री हिमांशु चन्द्रा और जिला पंचायत सीईओ श्री अमन वैष्णव के कुशल मार्गदर्शन में चलाए गए 'जल गंगा संवर्धन अभियान 2026' के तहत जिले में जल संरचनाओं के गहरीकरण और जल संचयन का एक विशाल अभियान सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है।
जनसहयोग से बढ़ा जल संग्रहण
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रही। अभियान के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- व्यापक भागीदारी: जिले की 243 ग्राम पंचायतों में 6500 से अधिक ग्रामीणों ने श्रमदान और सहयोग में हिस्सा लिया।
- गहरीकरण का लक्ष्य: कुल 400 जल संरचनाओं (तालाब, चेकडेम और स्टॉप डेम) को चिन्हित किया गया था, जिनमें से 352 का गहरीकरण कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
- मिट्टी का सदुपयोग: किसानों ने इन संरचनाओं से लगभग एक लाख 10 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉली उपजाऊ मिट्टी निकालकर अपने खेतों में डाली है, जिससे उन्हें दोतरफा लाभ मिला—एक ओर जल संरचनाओं की जल भराव क्षमता में 3.50 लाख घन मीटर की वृद्धि हुई, वहीं दूसरी ओर किसानों को कृषि के लिए उपजाऊ मिट्टी मिली।
जल संचयन के अन्य प्रमुख कार्य
अभियान के तहत बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है:
- खेत तालाब: जिले में 682 खेत तालाबों का निर्माण पूरा किया गया है।
- भूजल पुनर्भरण: 1915 डगवेल (खुले कुओं) को रिचार्ज करने का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ है।
- अमृत सरोवर: इस वर्ष 18 नए अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया है।
- अन्य परियोजनाएं: जल संचयन की 350 संरचनाओं और वाटर शेड परियोजनाओं के 60 कार्य संपन्न किए गए हैं।
जिला पंचायत नीमच के परियोजना अधिकारी श्री सुशील दौराया ने बताया कि इस अभियान ने ग्रामीण स्तर पर जल प्रबंधन को लेकर नई जागरूकता पैदा की है। प्रशासन का यह प्रयास भविष्य में जल संकट से निपटने और कृषि को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
