भोपाल: कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले मध्य प्रदेश में सरकार का पूरा ध्यान अब किसानों की आय को दोगुना करने पर केंद्रित है। 'कृषक कल्याण वर्ष' के अंतर्गत राज्य सरकार परंपरागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर) और पशुपालन को नई दिशा दे रही है, ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
भावांतर योजना से मिल रहा उपज का सही दाम
सरकार की प्राथमिकता किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है। चूंकि सरकार के लिए हर उपज की खरीद कर पाना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए 'भावांतर भुगतान योजना' को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। इसके माध्यम से बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की भरपाई प्रोत्साहन राशि के रूप में सीधे किसानों को की जा रही है। सोयाबीन के बाद अब सरसों और उड़द जैसी फसलों को भी इसके दायरे में लाकर किसानों को राहत दी गई है। इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे को चार गुना तक बढ़ाकर किसानों को बड़ी आर्थिक सुरक्षा दी गई है।
सिंचाई तंत्र का विस्तार: 100 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य
राज्य में पिछले दो वर्षों में 7.31 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता विकसित की गई है। सरकार का लक्ष्य 2026 तक इसे 8.44 लाख हेक्टेयर और 2030 तक 100 लाख हेक्टेयर तक पहुँचाने का है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी बड़ी अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के साथ-साथ प्रदेश की छोटी नदियों को जोड़ने पर भी सर्वे पूरा हो चुका है। इससे भविष्य में लगभग 6 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
उद्यानिकी और जैविक खेती में मप्र का डंका
राज्य में परंपरागत फसलों से हटकर किसान अब उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़कर 28.60 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है। साथ ही, मध्य प्रदेश जैविक खेती में देश में पहले पायदान पर बना हुआ है, जहाँ 17 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रमाणित है। अब राज्य सरकार 'प्राकृतिक खेती' को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष बोर्ड के साथ-साथ देसी गाय पालन के लिए अनुदान जैसी नई योजनाएं भी चला रही है।
पशुपालन से आएगी आर्थिक खुशहाली
दुग्ध उत्पादन में देश की कुल हिस्सेदारी में 9.12% का योगदान देने वाला मध्य प्रदेश, अब अपनी इस क्षमता को और बढ़ाने की ओर अग्रसर है। सरकार ने प्रतिदिन 52 लाख लीटर दूध संग्रहण का लक्ष्य रखा है। इसके लिए:
- सहकारी समितियों का विस्तार: पिछले एक साल में 895 नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाई गई हैं।
- अनुदान का लाभ: डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना (डेयरी इकाई के लिए 10 लाख तक का अनुदान) और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना (भैंस पालन पर 75% अनुदान) के माध्यम से किसानों को स्वावलंबी बनाया जा रहा है।
राज्य सरकार का मानना है कि इन समन्वित प्रयासों से न केवल खेती का दायरा बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश के किसानों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
