इंदौर: अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इंदौर के लक्ष्मीबाईनगर रेलवे स्टेशन का स्वरूप बदलने की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में है। स्टेशन के आधुनिकीकरण के तहत जल्द ही पुराने स्टेशन भवन को हटाकर वहां नई रेल लाइनें और आधुनिक प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे।
क्या है पूरी योजना?
रेलवे प्रशासन की योजना के अनुसार, स्टेशन के प्रबंधन और 'ऑपरेटिंग सिस्टम' (स्टेशन मास्टर यूनिट) को मौजूदा पुराने भवन से नए भवन में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। 15 से 20 जून के बीच यह बदलाव पूरा होने का लक्ष्य है। जैसे ही सारा संचालन नए भवन से होने लगेगा, पुराने ढांचे को ढहा दिया जाएगा। इस खाली जमीन का उपयोग अतिरिक्त रेल पटरियां बिछाने और नए प्लेटफॉर्म बनाने में किया जाएगा, ताकि जुलाई के पहले सप्ताह तक विकास कार्य को गति दी जा सके।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी
सांसद शंकर लालवानी के अनुसार, इस बदलाव के लिए रेलवे से आवश्यक ब्लॉक (अनुमति) मिल चुका है। इस स्टेशन को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है, ताकि 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान अधिकांश ट्रेनों का परिचालन यहीं से सुचारू रूप से हो सके। वर्तमान में इस स्टेशन से 5 एक्सप्रेस और 8 लोकल ट्रेनों का आवागमन होता है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:
- बजट: इस पुनर्विकास कार्य पर लगभग 55 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
- क्षमता विस्तार: स्टेशन पर दो अतिरिक्त पटरियां बिछाई जा रही हैं और भागीरथपुरा की तरफ दो नए प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं।
- आधुनिक सुविधाएं: यात्रियों की सुविधा के लिए 36 फीट चौड़ा फुटओवर ब्रिज और तीन नई लिफ्ट लगाई जा रही हैं।
- लंबी ट्रेनों के लिए सुविधा: स्टेशन को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि भविष्य में 26 कोच वाली लंबी ट्रेनों का भी यहां आसानी से ठहराव हो सके।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस आधुनिकीकरण से यात्रियों को न केवल विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि इंदौर जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव भी कम होगा, जिससे रेल यातायात का संचालन और अधिक कुशल हो सकेगा।
