मध्य प्रदेश: वनरक्षक और जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा स्थगित होने पर सियासत तेज, दिग्विजय सिंह ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग


भोपाल। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित वनरक्षक, क्षेत्र रक्षक, जेल प्रहरी और सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा-2026 की द्वितीय पाली को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक स्थगित करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है।

अभ्यर्थियों को भारी परेशानी का सामना 
दिग्विजय सिंह ने इस बात पर चिंता जताई कि मुरैना, भिंड, ग्वालियर, सागर और बालाघाट जैसे दूर-दराज के जिलों से हजारों युवा अपना कीमती समय और पैसा खर्च करके परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे थे। अभ्यर्थियों के अनुसार, पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें पहले 10 मिनट की देरी की सूचना दी गई, लेकिन घंटों इंतजार के बाद अचानक परीक्षा निरस्त कर उन्हें केंद्र से बाहर कर दिया गया। अब यह परीक्षा 20 जून को सुबह 10 से 12 बजे के बीच आयोजित करने की जानकारी दी गई है।

सरकार से की मुआवजे की मांग 
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि:
  • उच्च स्तरीय जांच: परीक्षा के स्थगित होने के कारणों और इसमें शामिल अधिकारियों व एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • आर्थिक क्षतिपूर्ति: परीक्षा देने आए हजारों अभ्यर्थियों को जो यात्रा, भोजन और आवास का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है, सरकार उसकी भरपाई (मुआवजा) करे।

ब्लैकलिस्ट कंपनी को काम देने का आरोप 
दिग्विजय सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा का संचालन एक ऐसी कंपनी को सौंपा गया था, जिसे पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक जांच में सॉफ्टवेयर और तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जो पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाती हैं।

दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
कांग्रेस नेता ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोषियों को चिन्हित कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
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