नई दिल्ली: प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के 12 गौरवशाली वर्ष पूरे करने पर, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने एक लेख के माध्यम से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व शैली का विश्लेषण किया है। उन्होंने मोदी को एक ऐसे जननेता के रूप में रेखांकित किया है, जो देश की बदलती आकांक्षाओं और आधुनिक चुनौतियों को बखूबी समझते हैं।
जनता का विश्वास जीतने का अनूठा सफर
देवेगौड़ा ने अपने लेख में इस बात पर जोर दिया कि मोदी केवल सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने समय के साथ खुद को निरंतर विकसित किया। उन्होंने कहा कि लगातार तीन बार जनता द्वारा चुने जाना भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है। नेहरू के दौर की राजनीतिक परिस्थितियों और आज के दौर के बीच तुलना करते हुए उन्होंने माना कि वर्तमान में शासन चलाना कहीं अधिक कठिन है, क्योंकि आज का मतदाता अत्यधिक जागरूक है और सोशल मीडिया के युग में हर कदम पर समीक्षा होती है।
विरासत के बिना बनाई अपनी पहचान
पूर्व पीएम ने इस बात का विशेष जिक्र किया कि मोदी को किसी भी राजनीतिक वंश या विरासत का लाभ नहीं मिला। उन्होंने अपनी मेहनत, संगठनात्मक कौशल और जनता के साथ सीधे संवाद के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई है। देवेगौड़ा ने स्वीकार किया कि उन्हें स्वयं अक्सर यह देखकर आश्चर्य होता है कि आखिर मोदी दशकों से जनता का भरोसा बनाए रखने में कैसे सफल रहे। इसका उत्तर उन्होंने मोदी के अनुशासन, अटूट ऊर्जा और निरंतर 'आत्ममंथन' करने की प्रवृत्ति में बताया है।
समावेशी नेतृत्व का प्रतिबिंब
सामाजिक प्रतिनिधित्व पर बात करते हुए देवेगौड़ा ने कहा कि मोदी सरकार में पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों और महिलाओं की भागीदारी पहले की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट है। उन्होंने संसद और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की सक्रियता को भारत के समावेशी लोकतंत्र के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया।
कठिन चुनौतियों के बीच दृढ़ नेतृत्व
लेख में मोदी की कार्यशैली के अन्य पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया:
- विदेश नीति और सुरक्षा: राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सैन्य तनाव के दौरान मोदी के निर्णायक फैसलों की प्रशंसा की गई।
- आर्थिक दृष्टि: भारत को एक तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को सराहा गया।
- आत्मचिंतन: देवेगौड़ा के अनुसार, मोदी की सफलता का सबसे बड़ा सूत्र उनका आत्मचिंतनशील व्यक्तित्व है, जो उन्हें जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी नीतियों को ढालने में मदद करता है।
