पिटोल। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण तब देखने को मिला, जब कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिटोल के औचक निरीक्षण के दौरान स्वयं एक चिकित्सक की भूमिका निभाई।
डॉक्टर की अनुपस्थिति में संभाली कमान
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को पता चला कि केंद्र पर पदस्थ डॉक्टर को पोस्टमार्टम कार्य के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया है, जिससे ओपीडी में मरीजों और गर्भवती महिलाओं की लंबी कतार लग गई थी। मरीजों को प्रतीक्षा करते देख कलेक्टर डॉ. भरसट ने बिना समय गंवाए ओपीडी में स्वयं मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करना शुरू कर दिया।
उन्होंने विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति की जांच की, उनसे गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर संवाद किया और पोषण तथा टीकाकरण के महत्व को समझाया।
ऑनलाइन रिकॉर्ड और एएनसी (ANC) जांच पर जोर
कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं के एएनसी (Ante Natal Check-up) डेटा की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्टियों की प्रक्रिया को परखा और मौके पर ही रिकॉर्ड अद्यतन (अपडेट) करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीयन और नियमित फॉलोअप अनिवार्य है।
- उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान समय रहते होनी चाहिए ताकि उन्हें बेहतर उपचार मिल सके।
अधोसंरचना और सुविधाओं का जायजा
कलेक्टर ने स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की उपलब्धता और मरीजों को मिल रही सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मरीजों को किसी भी स्तर पर अनावश्यक परेशानी न हो और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित की जाएं। इसके अलावा, उन्होंने नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का अवलोकन कर वहां सभी आवश्यक व्यवस्थाएं शीघ्र पूर्ण करने को कहा, ताकि स्थानीय स्तर पर ही नागरिकों को बेहतर उपचार मिल सके।
कलेक्टर की इस कार्यशैली ने न केवल स्वास्थ्य अमले को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सतर्क किया, बल्कि स्थानीय निवासियों में प्रशासन के प्रति विश्वास को भी और मजबूत किया है।
