देवास। सरकारी योजनाओं का सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो ग्रामीण परिवेश में भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी जा सकती है। देवास जिले के बागली विकासखंड के लिम्बोदा गाँव के रहने वाले श्री जगदीश पाटीदार की कहानी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो स्थानीय स्तर पर अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
योजना का मिला संबल
जगदीश पाटीदार ने खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र में कुछ नया करने का सपना देखा था। उन्हें उद्यानिकी विभाग के माध्यम से 'प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन (PMFME) योजना' की जानकारी मिली। विभाग के सहयोग से उन्हें मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक, हाटपीपल्या से 8 लाख 42 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इतना ही नहीं, योजना के तहत उन्हें 3 लाख 27 हजार रुपये की सब्सिडी का लाभ भी मिला, जिससे उन्हें अपने व्यवसाय को शुरू करने में बड़ी आर्थिक मदद मिली।
'पुलकित पापड़ उद्योग' की सफलता
आर्थिक सहायता मिलते ही जगदीश ने 'पुलकित पापड़ उद्योग' की स्थापना की। आज उनका यह उद्यम न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी रोजगार का केंद्र बन गया है:
- उत्पादन क्षमता: प्रतिमाह लगभग 15 से 16 क्विंटल पापड़ का उत्पादन।
- सीजनल मुनाफा: पापड़ का व्यवसाय मुख्य रूप से 5 से 6 महीने तक चलता है, जिसमें खर्च निकालने के बाद जगदीश को प्रतिमाह लगभग 35 हजार रुपये की शुद्ध आय होती है।
- रोजगार का सृजन: जगदीश अब न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि उन्होंने 5 अन्य स्थानीय लोगों को भी रोजगार प्रदान किया है।
एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान
जगदीश पाटीदार बताते हैं कि यह योजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। आज वे समाज में एक सफल और आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपनी सफलता का श्रेय वे केंद्र की पीएमएफएमई योजना को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।
जगदीश पाटीदार का यह सफर साबित करता है कि सरकारी सहयोग और नवाचारी सोच के साथ गाँव से भी बड़ी सफलता की कहानी शुरू की जा सकती है।
