इंदौर में लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: करोड़पति निकला महिला एवं बाल विकास विभाग का संयुक्त संचालक


इंदौर: भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें उनकी आय से कहीं अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ है।

30 साल की सेवा में जुटाया करोड़ों का साम्राज्य
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच के अनुसार, वर्ष 1996 से कार्यरत कंडवाल की कुल वैधानिक आय करीब 2.80 करोड़ रुपये है, जबकि उनके पास मिली अचल संपत्ति का मूल्य लगभग 9.76 करोड़ रुपये आंका गया है। यह उनकी आय से करीब 241 प्रतिशत अधिक है। लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय की टीम ने गोपनीय सूचना के आधार पर तीन अलग-अलग टीमों का गठन किया और एक साथ विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी।

प्रमुख संपत्तियों का विवरण
छापेमारी के दौरान सामने आए दस्तावेजों से पता चला कि आरोपी अधिकारी ने न केवल आलीशान मकान, बल्कि औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में भी भारी निवेश किया है:
  • आलीशान आवास और व्यावसायिक परिसर: स्कीम नंबर-103 में 252 वर्गमीटर भूखंड पर बना 13,500 वर्गफीट का बहुमंजिला भवन, जिसमें आवास और व्यावसायिक परिसर शामिल हैं।
  • भूखंड और निवेश: स्कीम नंबर-140 में दो व्यावसायिक प्लॉट के साथ ही धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से लगे तारपुरा, बेकलाय, बनेड़िया जैसे क्षेत्रों में 11 से अधिक मूल्यवान भूखंड खरीदे गए हैं।
  • बैंक लॉकर: कार्रवाई के दौरान सराफा बाजार स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में एक बैंक लॉकर का भी पता चला है, जिसे खंगाला जा रहा है।
कार्रवाई जारी
लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13 (1) बी और 13 (2) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। अधिकारी के सुपर स्टोर और जिम सहित अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर भी जांच चल रही है। वर्तमान में दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स का मिलान किया जा रहा है, और माना जा रहा है कि जांच पूरी होने तक अनुपातहीन संपत्ति का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
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