इंदौर RTO में 'वाहन-4' पोर्टल का सर्वर डाउन: फिटनेस, परमिट और आरसी के काम ठप; वाहन डिलीवरी भी अटकी


इंदौर: मध्य प्रदेश के परिवहन कार्यालयों (RTO) को डिजिटल बनाने का दावा उस वक्त हवा होता नजर आ रहा है, जब मुख्य ऑनलाइन सिस्टम ही जवाब दे गया। 'वाहन-4' पोर्टल में आ रही लगातार तकनीकी दिक्कतों के चलते इंदौर समेत पूरे प्रदेश में वाहनों से जुड़े जरूरी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पोर्टल का बार-बार बंद (लागआउट) होना, सर्वर की धीमी रफ्तार और मोबाइल पर ओटीपी (OTP) न आने जैसी समस्याओं के कारण आम जनता के ऑनलाइन आवेदन बीच में ही अटक रहे हैं।

इसका सीधा असर नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन, फिटनेस सर्टिफिकेट, टैक्स भुगतान, रूट परमिट और आरसी (रजिस्ट्रेशन कार्ड) से जुड़े महत्वपूर्ण कामों पर पड़ रहा है।

रोजाना पेंडिंग हो रहे हैं सैकड़ों आवेदन, शोरूम पर खड़ी हैं गाड़ियां
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, हर दिन बड़ी संख्या में नए वाहनों के पंजीकरण के आवेदन ऑनलाइन सबमिट किए जाते हैं। लेकिन मुख्य पोर्टल का सर्वर सुस्त होने के कारण ये फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं और लंबित (पेंडिंग) मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

पेंडेंसी का असर: इस डिजिटल खराबी के कारण शोरूम से गाड़ियों की डिलीवरी मिलने में देरी हो रही है। लोग पैसे चुकाने के बाद भी गाड़ी घर ले जाने के लिए आरटीओ क्लियरेंस का इंतजार करने को मजबूर हैं।

फिटनेस सेंटर बेहाल, रिपोर्ट अपलोडिंग में आ रही दिक्कत
व्यावसायिक वाहनों (जैसे बस, ट्रक, ऑटो) के लिए जरूरी फिटनेस सेंटरों का भी यही हाल है। सेंटरों पर गाड़ियों की फिजिकल जांच तो रोजाना हो रही है, लेकिन जांच रिपोर्ट को पोर्टल पर अपलोड करते समय सर्वर डाउन हो जाता है। इसके अलावा:
  • आरसी से जुड़े काम रुके: वाहनों के मालिकाना हक का ट्रांसफर (नामांतरण), पता बदलने और डुप्लीकेट आरसी जारी करने जैसे काम पूरी तरह अटक गए हैं।
  • ट्रांसपोर्टर्स की बढ़ी मुसीबत: समय पर वाहन टैक्स जमा न हो पाने और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) मिलने में दो से तीन दिन की देरी हो रही है, जिससे कमर्शियल वाहनों का पहिया थम गया है।

सालों पुरानी समस्या, पर विभाग मौन
परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि 'वाहन पोर्टल' की यह तकनीकी समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई सालों से रह-रहकर सामने आती रही है। इसके बावजूद परिवहन विभाग इस गंभीर सॉफ्टवेयर और सर्वर समस्या का कोई स्थायी समाधान खोजने में नाकाम साबित हुआ है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर टैक्स भरने वाली जनता और ट्रांसपोर्टर्स को भुगतना पड़ रहा है।
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