सीहोर वन विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा: SDO के नाम पर 3.48 करोड़ का भुगतान, जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में


सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर वन विभाग में वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ उप वनमंडलाधिकारी (SDO) के फर्जी हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि निकाल ली गई। यह धांधली 'कैंपा' (CAMPA) मद से हुई है, जिसका उद्देश्य जंगलों का संरक्षण और संवर्धन है।

क्या है पूरा मामला?
SDO राजेश शर्मा ने आरोप लगाया है कि जब वे अतिरिक्त प्रभार पर थे, तब उनके नाम का दुरुपयोग कर भारी गड़बड़ी की गई। उनके अनुसार:
  • प्रभार की अवधि: 31 दिसंबर 2023 से 16 मार्च 2024 के बीच वे बुधनी (सामान्य) के प्रभार में थे।
  • वास्तविक भुगतान: इस दौरान उनके द्वारा नियमों के तहत केवल 1.78 करोड़ रुपये के प्रमाणक (वाउचर) सत्यापित कर भेजे गए थे।
  • फर्जी भुगतान: जाँच में सामने आया कि कुल 5.63 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसका मतलब है कि लगभग 3.84 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान उनके फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग करके किया गया।
नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए हुआ भुगतान
जाँच में सामने आया है कि कई प्रमाणकों को बिना आवक-जावक रजिस्टर में दर्ज किए ही सीधे वनमंडल कार्यालय भेज दिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस दिन (16 मार्च 2024) SDO ने अपना प्रभार छोड़ा, उसी दिन 76 लाख रुपये से अधिक के 15 प्रमाणक आनन-फानन में डिस्पैच किए गए।

इन फर्जी वाउचरों के माध्यम से निम्नलिखित कार्यों के नाम पर राशि निकाली गई:
  • वाहनों का डीजल खर्च।
  • जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण।
  • गेट्स फिक्सिंग कार्य।
  • नर्मदा रेत और गोबर खाद की खरीद। इन सभी पर वन परिक्षेत्र अधिकारी एमपी सिंह के हस्ताक्षर थे।
6 महीने बीतने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
इस पूरे खेल की जांच के लिए एल्विन बर्मन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया था, जिसने दिसंबर 2025 में ही अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी थी। हालाँकि, छह महीने बाद भी दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

इस संबंध में डीएफओ अर्चना पटेल का कहना है कि जांच टीम ने स्थल सत्यापन किया है, लेकिन प्रमाणकों पर मौजूद हस्ताक्षर असल में किसके हैं, यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। फिलहाल, प्रशासनिक सुस्ती के चलते यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
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