भोपाल। "देशभक्ति-जनसेवा" के मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस की शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने दो अलग-अलग मामलों में अपनी मानवीय संवेदनाओं, त्वरित कार्रवाई और उत्कृष्ट विवेचना का परिचय दिया है। जीआरपी ने दो मासूम बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर यह सिद्ध कर दिया है कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि मानवीय सरोकारों के लिए भी पूरी तरह तत्पर है।
1. ऑपरेशन 'हमदर्द': 11 दिनों में परिजनों को मिली एक माह की बच्ची
10 जुलाई को भोपाल रेलवे स्टेशन के ऑटो स्टैंड पर लगभग एक माह की लावारिस बच्ची मिलने की सूचना पर जीआरपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया और चिकित्सकीय परीक्षण कराकर शिशु गृह में सुरक्षित रखवाया।
- सघन तलाश: एक विशेष टीम गठित कर रेलवे स्टेशनों व शहर के सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण किया गया। विभिन्न राज्यों में सूचनाओं का आदान-प्रदान और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक तलाश अभियान चलाया गया।
- सफलता: लगातार 11 दिनों के अथक प्रयासों के बाद बच्ची के माता-पिता की पहचान कर ली गई। प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई कि आर्थिक तंगी के कारण बच्ची को रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया गया था। मामले में नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है।
2. बीना जीआरपी: मात्र 48 घंटे में अपहृत 8 माह की बच्ची सकुशल बरामद
बीना रेलवे स्टेशन पर अपनी मां से बिछुड़कर अपहृत हुई 8 माह की बच्ची के मामले में जीआरपी ने तत्काल अपराध दर्ज कर विशेष जांच दल का गठन किया।
- तकनीकी साक्ष्यों की मदद: बीना, भोपाल, रानी कमलापति, इटारसी, नर्मदापुरम और झांसी सहित कई रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज का सूक्ष्म परीक्षण किया गया।
- सफलता: जीआरपी और आरपीएफ के बीच प्रभावी समन्वय तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इटारसी रेलवे स्टेशन से आरोपी महिला को चिन्हित कर मात्र 48 घंटे के भीतर बच्ची को सकुशल दस्तयाब कर लिया गया।
इन दोनों ही मामलों में जीआरपी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी विश्लेषण, अंतर-जिला समन्वय और पेशेवर दृष्टिकोण अपनाकर मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील और जन-केंद्रित कार्यशैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
