इंदौर। मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल के दूरस्थ और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में अब अंधेरा छंट रहा है। 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' के तहत वनवासी अंचलों के उन घरों तक बिजली पहुँचाई जा रही है, जो मुख्य ग्रामों से दूर जंगलों, पहाड़ियों और नदियों के किनारे बसे हैं। अब तक कुल 15,855 घरों को स्थायी विद्युत कनेक्शन से जोड़ा जा चुका है।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियां
मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ट्रांसफार्मर, केबल और पोल स्थापित कर रोशनी का तोहफा दिया है। जिलों के अनुसार विद्युत प्रदाय का विवरण इस प्रकार है:
| जिला | लाभान्वित परिवारों की संख्या |
| बड़वानी | 4500 |
| खरगोन | 2240 |
| झाबुआ | 2007 |
| धार | 1500 |
| आलीराजपुर | 1470 |
| खंडवा | 1300 |
| देवास | 1056 |
| रतलाम | 928 |
| बुरहानपुर | 664 |
| अन्य (इंदौर/महू, मंदसौर, नीमच आदि) | शेष |
संसाधनों का पुख्ता प्रबंध और निरंतर मॉनिटरिंग
इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए विद्युत वितरण कंपनी ने युद्ध स्तर पर तैयारी की है:
- संसाधन: पर्याप्त संख्या में पोल, केबल और ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए गए हैं।
- अमल: तकनीकी विशेषज्ञों, श्रमिकों और वाहनों की तैनाती की गई है।
- निगरानी: अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कंपनी स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो प्रतिदिन कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ाव
इंदौर के महू जैसे पहाड़ी क्षेत्रों सहित झाबुआ, बड़वानी और आलीराजपुर के अत्यंत दुर्गम 'फलिए' और 'टोले' तक बिजली पहुँचने से न केवल वहां के निवासियों का जीवन आसान हुआ है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और स्थानीय लघु कार्यों को भी नई गति मिली है। शासन का यह अभियान जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।
