भोपाल। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए सोमवार को भोपाल के बड़े तालाब (अपर लेक) स्थित वाटरमैनशिप ट्रेनिंग सेंटर में 'अभ्यास बाढ़ व्यवस्था 2026' का आयोजन किया गया। भारतीय सेना की 'पश्चिम मध्य प्रदेश सब एरिया' के तत्वावधान में आयोजित यह संयुक्त युद्धाभ्यास सैन्य शक्ति और नागरिक प्रशासन के बेहतरीन तालमेल का जीवंत उदाहरण बना।
सेना और नागरिक एजेंसियों का अनुकरणीय समन्वय
इस वार्षिक आपदा राहत अभ्यास में सुदर्शन चक्र कोर, इंजीनियर रेजिमेंट टास्क फोर्स और सेना के विभिन्न कॉलमों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। आपदा प्रबंधन के इस वृहद कार्य में भारतीय सेना के साथ निम्नलिखित प्रमुख नागरिक एजेंसियाँ भी पूरी तत्परता के साथ शामिल हुईं:
- NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल)
- SDRF (राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल)
- राज्य राहत आयुक्त कार्यालय
अभ्यास के मुख्य आकर्षण
दिनभर चले इस युद्धाभ्यास को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया था:
- व्याख्यान सत्र: आपदा के दौरान योजना निर्माण, रिक्विजिशन प्रोटोकॉल और अंतर-एजेंसी समन्वय पर विस्तृत चर्चा हुई।
- सजीव प्रदर्शन (Live Demonstration): सैन्य कर्मियों और इंजीनियर टास्क फोर्स ने बाढ़ में फंसे नागरिकों को निकालने, सुरक्षित निष्कासन और अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग का साहसिक प्रदर्शन किया।
आपदा प्रबंधन को 'जनांदोलन' बनाने का आह्वान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेजर जनरल विकास लाल (जनरल ऑफिसर कमांडिंग, पश्चिम मध्य प्रदेश सब एरिया) ने सभी एजेंसियों के सामंजस्य की सराहना की। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी मशीनरी तक सीमित न रहे, बल्कि इसे एक 'जनांदोलन' बनाया जाना चाहिए। मेजर जनरल लाल ने सुझाव दिया कि जिला स्तरीय अधिकारियों और स्थानीय युवाओं के लिए नियमित व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि सामुदायिक स्तर पर संकट से निपटने की क्षमता को मजबूती दी जा सके।
यह अभ्यास न केवल आगामी मानसून चुनौतियों के लिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत करता है, बल्कि लोक-सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सेना और नागरिक प्रशासन के अटूट अंतर्संबंधों को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है।
