क्या था पूरा घटनाक्रम?
ग्राम जामला निवासी लगभग 62 वर्षीय बापू नाछरिया रावत का बीमारी के कारण निधन हो गया था। गुरुवार शाम परिजन और ग्रामीण उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए गांव के समीप स्थित बड़े नाले के किनारे बने श्मशान घाट पर एकत्र हुए थे। अंतिम संस्कार की रस्में चल ही रही थीं कि तभी अचानक तेज बारिश शुरू हो गई।
कुछ ही मिनटों के भीतर नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और देखते ही देखते बाढ़ का पानी श्मशान घाट तक पहुंच गया। पानी के तेज बहाव के कारण जलती हुई चिता और शव बहने लगे। इस भयावह दृश्य को देखकर परिजनों में चीख-पुकार मच गई और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल हो गया।
ग्रामीणों के साहस से बची गरिमा
इस कठिन स्थिति में भी गांव के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। अपनी जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों ने बहाव के बीच जाकर शव को पकड़ा और सुरक्षित स्थान पर खींच लिया। इस दौरान चिता का कुछ हिस्सा पानी में बह गया।
परिजनों और ग्रामीणों ने पानी का स्तर सामान्य होने तक घंटों प्रतीक्षा की। अंततः, जब नाले का बहाव कम हुआ, तब धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पुनः विधिवत अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
शोक में डूबा गांव
सरपंच प्रतिनिधि कैलाश भंवर के अनुसार, यह घटना पूरे गांव के लिए अत्यंत स्तब्ध करने वाली थी। एक ओर परिवार पहले ही अपने बुजुर्ग को खोने के गम में डूबा था, वहीं दूसरी ओर इस प्राकृतिक आपदा ने उनके दुख को और बढ़ा दिया। घटना के बाद से ही पूरा गांव शोक में डूबा है और ग्रामीण इस भयावह मंजर को याद कर भावुक हो रहे हैं।
