भोपाल: देश के सबसे बड़े स्वच्छता मूल्यांकन 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26' के तहत सिटीजन फीडबैक (नागरिक प्रतिक्रिया) का दौर अपने अंतिम पड़ाव पर आ गया है। इस बार के शुरुआती आंकड़े मध्य प्रदेश के लिए बेहद शानदार और उत्साहजनक परिणाम लेकर आए हैं। सूबे के कई बड़े शहरों ने अपने नागरिकों की जबरदस्त और सक्रिय भागीदारी के दम पर नेशनल रैंकिंग में बेहद मजबूत स्थिति हासिल की है।
खासतौर पर इंदौर, जबलपुर, भोपाल, उज्जैन और ग्वालियर जैसे महानगरों के निवासियों ने स्वच्छता के प्रति अपनी जागरूकता और जनसहभागिता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।
इंदौर ने फिर गाड़े झंडे, लखनऊ से मामूली अंतर से चूका पहला स्थान
सिटीजन फीडबैक के मामले में 'स्वच्छता की राजधानी' कहे जाने वाले इंदौर ने एक बार फिर अपनी ताकत का अहसास कराया है। इंदौर ने 8.50 लाख से अधिक नागरिकों का फीडबैक हासिल कर पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। हालांकि, इंदौर बेहद मामूली (करीब 31 हजार) फीडबैक के अंतर से पहले पायदान पर काबिज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पीछे रह गया।
वहीं, मध्य प्रदेश के ही जबलपुर शहर ने भी इस बार इतिहास रचते हुए लगभग 6 लाख फीडबैक जुटाए हैं और देश में चौथा स्थान अपने नाम किया है।
भोपाल, उज्जैन और ग्वालियर ने भी दिखाया दम
- भोपाल (15वां स्थान): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को 2.40 लाख से ज्यादा नागरिकों की प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जिसके साथ ही वह राष्ट्रीय स्तर पर 15वें पायदान पर खड़ा है। भले ही यह शीर्ष शहरों से कम हो, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे काफी बेहतर माना जा रहा है।
- उज्जैन: बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन ने भी 1.53 लाख से अधिक फीडबैक दर्ज कराकर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।
- ग्वालियर: तानसेन की नगरी ग्वालियर ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए 1.04 लाख से अधिक फीडबैक जुटाने में सफलता पाई है।
क्यों खास है 'सिटीजन फीडबैक' और क्या है अंकों का गणित?
स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत किसी भी शहर की फाइनल रैंकिंग तय करने में वहां की जनता की राय बेहद अहम होती है:
- कुल मूल्यांकन: स्वच्छ सर्वेक्षण का पूरा कॉम्पिटिशन कुल 12,500 अंकों का होता है।
- फीडबैक के अंक: इस पूरे स्कोर में से सीधे 1,000 अंक केवल नागरिक फीडबैक के लिए तय किए गए हैं। यह अंक इस बात का पैमाना हैं कि किसी शहर के निवासी कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई और नगर निगम की सेवाओं को लेकर कितने सजग हैं। इस पैमाने पर एमपी के शहरों का प्रदर्शन अन्य राज्यों के मुकाबले काफी आगे रहा है।
अंतिम नतीजों से बड़ी उम्मीदें: विशेषज्ञों का मानना है कि जनभागीदारी के इन शानदार आंकड़ों से साफ है कि मध्य प्रदेश में स्वच्छता अब सिर्फ एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जन-आंदोलन बन चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि जब स्वच्छ सर्वेक्षण के अंतिम नतीजे घोषित होंगे, तब मध्य प्रदेश एक बार फिर देश के पटल पर अपनी स्वच्छता का परचम लहराएगा।
