सिंहस्थ 2028 की तैयारी: 'हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना' से बदलेगी उज्जैन की तस्वीर, 1133 करोड़ से सुनिश्चित होगी जल सुरक्षा


दिनांक : 19 जून 2026
उज्जैन। आगामी सिंहस्थ महापर्व-2028 को देखते हुए उज्जैन में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप 'हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना' पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। 1133.67 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य न केवल लाखों श्रद्धालुओं की प्यास बुझाना है, बल्कि शहर की बढ़ती आबादी के लिए भविष्य की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

निरीक्षण और कार्य की प्रगति
हाल ही में अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने संभागायुक्त श्री आशीष सिंह, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह और नगर निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा के साथ परियोजना स्थल का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य की गुणवत्ता और गति पर संतोष व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह परियोजना निर्धारित 24 माह की समय-सीमा में पूरी कर ली जाएगी।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं:
  • जल स्रोत: इस योजना में सेलारखेड़ी, गंभीर, उंडासा एवं साहेबखेड़ी जैसे प्रमुख जल स्रोतों का समन्वय किया गया है।
  • आधुनिक बुनियादी ढांचा: 100 एमएलडी (MLD) क्षमता के जल शोधन संयंत्र (Water Treatment Plant) का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसमें इंटेकवेल, क्लैरिफ्लोक्युलेटर और फिल्टर हाउस जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।
  • अमृत रेखा पोर्टल का नवाचार: परियोजना की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए पीएचई विभाग द्वारा विकसित 'अमृत रेखा' पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पाइपलाइन बिछाने के कार्यों की प्रगति को सीधे ट्रैक किया जा सकेगा।
  • पुरानी लाइनों का कायाकल्प: जल बर्बादी को रोकने के लिए पुरानी पाइपलाइनों को बदला जा रहा है, ताकि हर घर तक पर्याप्त और शुद्ध पेयजल पहुँच सके।
सीवर विस्तार कार्य का भी निरीक्षण
परियोजना के साथ-साथ शहर में अमृत 2.0 योजना के तहत चल रहे कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने पार्श्वनाथ कॉलोनी में जारी सीवर लाइन विस्तार कार्य का जायजा लिया, जहाँ 200 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सिंहस्थ 2028 से पहले सभी जल और सीवर संबंधी बुनियादी ढांचों को पूर्ण कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और शहर को एक व्यवस्थित जल प्रबंधन तंत्र मिल सके।
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