रतलाम में 89 करोड़ की सड़क, पर 30 गांवों के लिए रास्ता आज भी 'अधूरा': 10 साल से पुलिया का इंतजार


आलोट (रतलाम): मध्य प्रदेश के सड़क विकास के बड़े दावों की पोल रतलाम जिले की एक परियोजना खोल रही है। 89 करोड़ रुपये की लागत से बनी 59 किलोमीटर लंबी जावरा-सीतामऊ-असावती सीसी रोड एक दशक पहले तो बन गई, लेकिन मार्ग पर पड़ने वाली तीन बड़ी पुलियाएं आज भी अधूरी हैं। इस लापरवाही के कारण क्षेत्र के करीब 30 गांवों के हजारों ग्रामीण हर साल बारिश के मौसम में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

10 साल का इंतजार, बदल गए ठेकेदार, पर नहीं बनी पुलिया
ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क पिछले 10 वर्षों से उपयोग में है, लेकिन असावती, रोला और भड़का गांव के पास पुलियाएं न होने से यह मार्ग अधूरा सा लगता है। इस अधूरी परियोजना का घटनाक्रम कुछ ऐसा रहा:
  • विफल हुआ पहला प्रयास: वर्ष 2018-19 में ब्रिज कॉर्पोरेशन ने इन पुलियाओं के लिए 24 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था, लेकिन ठेकेदार काम बीच में ही छोड़कर भाग गया। विभाग ने उसे ब्लैकलिस्ट तो किया, लेकिन काम दोबारा शुरू नहीं हो सका।
  • बढ़ती गई लागत: अब संशोधित प्रस्ताव के साथ 31 करोड़ रुपये का नया टेंडर 'भक्ति कंस्ट्रक्शन' को सौंपा गया है। विडंबना यह है कि एप्रोच रोड और बढ़ी हुई लागत (रिवाइज्ड एस्टिमेट) को शासन से प्रशासनिक स्वीकृति अब तक नहीं मिली है, जिसके चलते निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।
जनता परेशान, जिम्मेदार खामोश
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मार्ग तीन जिलों और राजस्थान की सीमा को जोड़ता है, लेकिन पुलों के अभाव में लोगों को वैकल्पिक रास्तों से होकर 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।

ग्रामीणों का आक्रोश:
माधोपुर के निवासी राजू डाबी का कहना है कि 10 साल बीत जाने के बाद भी यह समझ से परे है कि सड़क मंजूर होते समय पुलों की स्वीकृति साथ में क्यों नहीं ली गई? कांग्रेस नेता बलवंतसिंह गोंदीशंकर ने भी इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और तत्काल निर्माण शुरू करने की मांग की है।

क्या कहता है प्रशासन?
ब्रिज कॉर्पोरेशन के एसडीओ रघुनाथ सूर्यवंशी के अनुसार, निर्माण कार्य के लिए आवश्यक एप्रोच रोड और संशोधित राशि की फाइल फिलहाल शासन स्तर पर लंबित है। उनका दावा है कि जैसे ही उच्च स्तर से प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होगी, काम को युद्धस्तर पर पूरा कराया जाएगा।

एक नजर में आंकड़ों की मार:
विवरणस्थिति
परियोजना की कुल लागत89 करोड़ (सीसी रोड) + पुलिया लागत
पहला टेंडर (2018-19)24 करोड़ (ठेकेदार अधूरा काम छोड़ गया)
संशोधित टेंडर (वर्तमान)31 करोड़ (फाइल शासन स्तर पर अटकी)
नुकसान10 साल का समय, 30 गांव प्रभावित, 7 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
साफ है कि सरकारी फाइलों और प्रशासनिक देरी के कारण जनता पर न केवल अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, बल्कि 30 गांवों के ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी-नाले पार करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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