इंदौर में सड़क निर्माण पर सियासी तकरार: कंक्रीट सड़क पर डामरीकरण को लेकर भिड़े नेता प्रतिपक्ष और एमआईसी सदस्य


इंदौर: शहर के चंद्रगुप्त मौर्य चौराहे से बापट चौराहे के बीच बन रही सड़क इन दिनों इंदौर की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे और जनकार्य प्रभारी (एमआईसी सदस्य) राजेंद्र राठौर इस सड़क के निर्माण कार्य को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। दोनों के बीच छिड़े इस विवाद में एक-दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष के आरोप: "घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश"
नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इस मामले में निगमायुक्त को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि:
  • घटिया निर्माण: चौकसे का कहना है कि कुछ महीने पहले जिस कंक्रीट सड़क का निर्माण किया गया था, वह मानक के अनुरूप नहीं थी और काफी निम्न स्तर की थी।
  • सुनियोजित घोटाला: नेता प्रतिपक्ष का दावा है कि पहले कंक्रीट सड़क के नाम पर काम हुआ, जिसे अब अपनी नाकामी और घोटाला छिपाने के लिए डामर की परत चढ़ाकर ढका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार माह पहले सड़क को एक-एक फीट खोदकर जो निर्माण किया गया था, वह बेहद खराब स्थिति में है।
एमआईसी सदस्य का पलटवार: "आरोप निराधार, टेंडर ही नहीं हुए"
दूसरी ओर, एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की गलतफहमी करार दिया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा:
  • गलत जानकारी: राठौर के अनुसार, पिछले दस वर्षों में चंद्रगुप्त मौर्य से बापट चौराहे के बीच सीमेंटीकरण का कोई टेंडर ही जारी नहीं हुआ था।
  • मेट्रो का काम: उन्होंने स्पष्ट किया कि मेट्रो कॉर्पोरेशन ने अपने पिलर निर्माण के दौरान जो खोदाई की थी, कंक्रीट का कार्य (Restoration) उसी एजेंसी द्वारा किया गया था। निगम वर्तमान में केवल डामरीकरण (Asphalting) का काम कर रहा है।
  • नैतिक चुनौती: एमआईसी सदस्य ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो वे अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं।
विवाद के पीछे की हकीकत
यह टकराव इंदौर के विकास कार्यों में जवाबदेही और एजेंसियों के बीच तालमेल को लेकर चल रही खींचतान का एक उदाहरण है। जहां नेता प्रतिपक्ष इसे निगम के भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि यह केवल एक नियमित मेंटेनेंस कार्य है जिसे मेट्रो निर्माण कार्य के बाद पूरा किया जा रहा है। इस विवाद पर अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे यह मामला और गरमाता जा रहा है।
Previous Post Next Post

نموذج الاتصال