इंदौर: शहर के ऐतिहासिक व्यापारिक क्षेत्र 'छावनी' में नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ और सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। शनिवार शाम कांग्रेस के नेतृत्व में एक विशाल विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसने सरकार की नीतियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
'उज्जैन जैसा मुआवजा हमें क्यों नहीं?'
प्रदर्शनकारियों का सबसे बड़ा मुद्दा मुआवजे की विसंगति है। मंच से व्यापारियों ने साफ तौर पर पूछा कि जब उज्जैन में मकान-दुकान टूटने पर सरकार दोगुना मुआवजा दे सकती है, तो फिर इंदौर के प्रभावितों के साथ यह भेदभाव क्यों? प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मांग की कि किसानों की जमीन अधिग्रहण की तर्ज पर उन्हें भी बाजार दर से चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए, क्योंकि उनकी संपत्तियां पुश्तैनी थीं।
कार्रवाई में पक्षपात के आरोप
स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने निगम की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंच से आरोप लगाया गया कि सत्ताधारी दल से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति की इमारत को कार्रवाई के दायरे से जानबूझकर बाहर रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि जहां सामान्य नागरिकों को अपना पक्ष रखने या स्टे लेने का अवसर तक नहीं दिया गया, वहीं सिस्टम ने चहेतों को बचाने का काम किया।
भविष्य की अनिश्चितता और डर
रहवासियों में एक गहरा डर व्याप्त है—'भविष्य में फिर से तोड़फोड़ का'। लोगों का कहना है कि यदि वे अभी 60 फीट सड़क के हिसाब से अपने निर्माण दोबारा करते हैं, तो कल कोई अधिकारी मास्टर प्लान की 80 फीट चौड़ाई का हवाला देकर फिर से सब कुछ ढहा देगा। इसके अलावा, जीपीओ से अर्जुन प्याऊ तक की सड़क के लिए भी 18 फीट के बजाय 24 मीटर के नोटिस जारी करने पर भी लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
विरोध प्रदर्शन में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
इस प्रदर्शन में शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और सत्यनारायण पटेल के साथ-साथ प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी, पिंटू जोशी, राजेश चौकसे, गिरधर नागर और शैलू सेन सहित कई पार्षद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
