खंडवा: निमाड़ अंचल के औद्योगिक और आर्थिक विकास की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने बैतूल-खंडवा-खरगोन-बड़वानी मार्ग के कायाकल्प के लिए 4,415 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह 234 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर न केवल एक सड़क मार्ग है, बल्कि यह निमाड़ की अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा।
देशगांव बनेगा 'जंक्शन': खुलेगा विकास का नया द्वार
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र 'देशगांव' होगा। पहले से स्वीकृत इंदौर-हैदराबाद नेशनल हाईवे (इंदौर-एदलाबाद मार्ग) के बाद, अब बैतूल-जुलवानिया (अहमदाबाद) नेशनल हाईवे के जुड़ने से देशगांव दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का संगम स्थल (जंक्शन) बन जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जंक्शन के बनने से यहाँ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में निवेश की अपार संभावनाएं पैदा होंगी, जिससे खंडवा एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभरेगा।
कृषि और व्यापार को मिलेगी नई गति
निमाड़ की पहचान उसके समृद्ध कृषि उत्पादों—केला, कपास, सोयाबीन और गेहूं—से है। अब तक परिवहन की चुनौतियों के कारण किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस नए हाईवे के माध्यम से:
- गुजरात से कनेक्टिविटी: मध्य प्रदेश का पश्चिमी हिस्सा अब सीधे गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों से जुड़ जाएगा।
- समय और लागत में कमी: बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों को समय पर बड़े बाजारों तक पहुँचाना आसान होगा, जिससे किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
- औद्योगिक विस्तार: कम समय में माल परिवहन की सुविधा से कृषि-आधारित उद्योगों और लघु उद्योगों को नई गति मिलेगी।
परियोजना पर एक नजर:
- कुल बजट: 4,415 करोड़ रुपये।
- कुल लंबाई: 234 किलोमीटर।
- मुख्य रूट: बैतूल, हीवारखेड़ी, रोशनी, आशापुर, रूधी, खंडवा, देशगांव, खरगोन और जुलवानिया।
- मॉडल: हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM)।
- राष्ट्रीय राजमार्ग: एनएच-347बी।
जल्द शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया
NHAI के परियोजना निदेशक आशुतोष सोनी के अनुसार, देशगांव से रूधि और आशापुर से रोशनी के बीच का काम पहले से ही प्रगति पर है। केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद अब शेष बचे कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस निर्णय को निमाड़ क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर बताया है। माना जा रहा है कि यदि यह परियोजना तय समय सीमा में पूर्ण होती है, तो यह मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों की एक नई इबारत लिखेगी।
