भोपाल: मध्य प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी अब आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 'विस्थापन' और 'जल-जंगल-जमीन' के अधिकारों को अपना मुख्य राजनीतिक एजेंडा बना रही है।
सिंगरौली से शुरू होगा आंदोलन का बिगुल
कांग्रेस की इस नई रणनीति की शुरुआत सिंगरौली से होगी। यहाँ कोयला परियोजनाओं के विस्तार के कारण बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार विस्थापित हो रहे हैं और वन क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, छतरपुर और पन्ना जिलों में 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' के कारण प्रभावित होने वाले ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों की चिंताओं को भी पार्टी प्रमुखता से उठाएगी।
30 जून को सिंगरौली में शक्ति प्रदर्शन
आदिवासियों के बीच अपनी पैठ बनाने के उद्देश्य से कांग्रेस ने 30 जून को सिंगरौली में एक विशाल जनसभा आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस सभा के जरिए पार्टी यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि वह आदिवासियों के विस्थापन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
आदिवासी विकास सलाहकार परिषद का गठन
पार्टी संगठन को मजबूती देने के लिए कांग्रेस जल्द ही 'आदिवासी विकास सलाहकार परिषद' की प्रदेश इकाई का गठन करने जा रही है। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर हुई बैठक में राहुल गांधी ने भी आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाने के निर्देश दिए थे। इस नई इकाई में राज्य के सभी आदिवासी अंचलों को समान प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
राजनीतिक समीकरणों को साधने की कवायद
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदाय चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसलिए, स्थानीय चुनावों से पहले कांग्रेस का यह कदम आदिवासी मतदाताओं के भरोसे को फिर से जीतने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
