भोपाल। भगवान गौतम बुद्ध के प्रमुख शिष्यों—आदरणीय श्री सारिपुत्र और श्री महामोद्गलायन—के पवित्र अस्थि अवशेष मंगोलिया में दस दिवसीय सफल आध्यात्मिक प्रवास के बाद गुरुवार को भोपाल के राजा भोज विमानतल पर वापस पहुँच गए। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस भव्य स्वागत समारोह में धर्मपरायण श्रद्धालुओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन पवित्र अवशेषों का श्रद्धापूर्वक अभिनंदन किया।
'वसुधैव कुटुम्बकम्' के वैश्विक दूत प्रधानमंत्री मोदी
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भगवान बुद्ध का शांति, करुणा और जनकल्याण का संदेश आज भी समूची मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने आगे कहा:
"प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के साथ भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ कर रहे हैं। जिन देशों तक बुद्ध का संदेश पहुँचा है, वहाँ भारत के साथ हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव की जड़ें और गहरी हुई हैं।"
मंगोलिया में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री के विशेष प्रयासों से ही दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों को इन पवित्र अवशेषों के दर्शन का दुर्लभ सौभाग्य मिल पा रहा है। मंगोलिया की राजधानी उलानबातर स्थित गंदन तेगचेनलिंग मठ में आयोजित प्रदर्शनी के दौरान लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने इन अवशेषों के समक्ष नतमस्तक होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
पवित्र अवशेषों की वापसी
गत 28 मई 2026 को भोपाल से मंगोलिया भेजे गए इन अवशेषों को 10 जून को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से वापस भारत लाया गया। भोपाल पहुँचने पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इन पवित्र अवशेषों को महाबोधि सोसायटी, साँची और रायसेन जिला प्रशासन को विधिवत सौंप दिया।
इस अवसर पर महाबोधि सोसायटी, साँची के पूज्य भिक्षुओं, संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन के कर्नल यश सक्सेना ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
