मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की पहल: भोपाल में आयोजित जनसुनवाई में सुलझे 28 गंभीर मामले, कई परिवारों को बचाया गया


भोपाल। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और पारिवारिक विवादों के त्वरित निराकरण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग ने भोपाल में एक वृहद जनसुनवाई का आयोजन किया। आयोग के समक्ष आए 28 गंभीर मामलों की सुनवाई के दौरान कई उजड़ते परिवारों को बचाया गया, वहीं कुछ जटिल मामलों में सख्त निर्देश भी जारी किए गए।

इस उच्च स्तरीय जनसुनवाई में आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव, सदस्य श्रीमती साधना स्थापक और सचिव श्रीमती/श्री सुरेश तोमर विशेष रूप से उपस्थित रहे।

घरेलू हिंसा और साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश:
जनसुनवाई के दौरान मुख्य रूप से घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर प्रताड़ना, गंभीर पारिवारिक विवाद और वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों से जुड़े मामले सामने आए। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को त्वरित कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।

काउंसलिंग से सुलझे मामले:
  • सराहनीय समझौता: एक मामले में, जहाँ पत्नी ने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, आयोग की बेंच द्वारा की गई गहन काउंसलिंग और समझाइश रंग लाई। दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया और महिला ने अपनी शिकायत वापस ले ली।
  • पारिवारिक विवाद: एक अन्य मामले में, जहाँ पत्नी साथ रहने को तैयार थी लेकिन पति आरोपों के चलते इनकार कर रहा था, आयोग ने आपसी संवाद से मतभेद दूर करने की सलाह दी।
एक अनोखा मामला - पत्नी के शासकीय अधिकारी बनने पर विवाद:
जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया जिसने सभी का ध्यान खींचा। एक पारिवारिक विवाद में शिकायतकर्ता पत्नी अनुपस्थित रही, जबकि उसके पति ने पेश होकर अपनी पीड़ा सुनाई। पति का आरोप था कि उनकी शादी को 18 साल हो चुके हैं, लेकिन जब से पत्नी शासकीय सेवा में 'अधिकारी' के पद पर नियुक्त हुई है, तब से उसने साथ रहने से इनकार कर दिया है और झूठे आरोप लगाकर अलग रह रही है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने निर्देश दिए हैं कि आगामी जनसुनवाई में दोनों पक्षों (पत्नी और पति) की उपस्थिति अनिवार्य होगी, ताकि निष्पक्ष जांच कर उचित न्याय किया जा सके।

आयोग का स्पष्ट संदेश:
आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि महिला आयोग हर पीड़ित महिला को न्याय दिलाने और टूटेते परिवारों को जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी स्तर पर मंच का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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