भोपाल। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में आयोजित 'शिक्षा संवाद' कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों के लिए एक नया रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले केंद्र नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान खोजने वाले 'ज्ञान केंद्र' होने चाहिए।
उच्च शिक्षा में 'सार्थक' क्रांति
मंत्री श्री परमार ने शैक्षणिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल समाधानों पर जोर दिया:
- सार्थक ऐप का विस्तार: प्राध्यापकों की उपस्थिति के बाद, अब वर्तमान सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति भी 'सार्थक ऐप' के माध्यम से दर्ज होगी। इससे शिक्षण में अनुशासन, नियमितता और गुणवत्ता आएगी।
- समयबद्धता ही आधारशिला: मंत्री ने स्पष्ट किया कि समय पर प्रवेश, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहचान है। इसके लिए डिजिटल मूल्यांकन और ऑनलाइन परीक्षा प्रबंधन को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप सुधार
मंत्री ने विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया कि वे केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रहें:
- शोध का व्यावहारिक उपयोग: शोध कार्य को उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्थानीय समस्याओं के समाधान से जोड़ा जाए।
- बहुविषयक शिक्षा: भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए।
- नवाचार और स्टार्टअप: विश्वविद्यालयों को उद्योगों के साथ समन्वय स्थापित कर नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना होगा।
विद्यार्थी केंद्रित कार्य संस्कृति
मंत्री ने विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी-हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए:
- संवाद की संस्कृति: उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि वे विद्यार्थियों की समस्याओं को संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ सुलझाने के लिए निरंतर संवाद बनाए रखें।
- छात्रावासों का निरीक्षण: कार्यक्रम के बाद मंत्री श्री परमार ने गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों को छात्रावासों में स्वच्छता, सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण भोजन और आवश्यक मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।
आदर्श विश्वविद्यालय का संकल्प
मंत्री श्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सभी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध और सुशासन का 'आदर्श मॉडल' बनाना है। उन्होंने परिसर में खेल सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों और प्लेसमेंट सेल को और अधिक सशक्त करने पर भी विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. विवेक शर्मा, समाजसेवी श्री चेतस सुखाड़िया सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
