इंदौर। जिले में कुपोषण की रोकथाम और सुपोषण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य शासन द्वारा संचालित पोषण संबंधी सभी योजनाओं का परिणाममूलक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जिले का कोई भी बच्चा कुपोषण का शिकार न रहे।
इस बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी श्री रजनीश सिंह सहित सहायक संचालक, परियोजना अधिकारी और ब्लॉक कॉर्डिनेटर उपस्थित रहे।
बैठक के प्रमुख बिंदु और निर्देश:
- कुपोषित बच्चों की त्वरित देखभाल: कलेक्टर ने निर्देश दिए कि चिन्हित कुपोषित बच्चों को तत्काल आवश्यक पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके पोषण स्तर में सुधार के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं। प्रत्येक गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चे के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए।
- आंगनवाड़ियों में भोजन की गुणवत्ता: आंगनवाड़ी केंद्रों पर समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले नाश्ते और भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पौष्टिकता सुनिश्चित करने को कहा गया। किचन शेड की साफ-सफाई और मातृ सहयोगिनी समितियों को सक्रिय कर भोजन की सतत निगरानी के निर्देश दिए गए। साथ ही, अधिकारियों को क्षेत्र भ्रमण के दौरान स्वयं भोजन का परीक्षण करने को कहा गया।
- योजनाओं की समीक्षा: बैठक में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना और [Aadhaar Redacted] आईडी सत्यापन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी निर्धारित लक्ष्य समय-सीमा में पूरे करने के निर्देश दिए।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई:
समग्र सत्यापन और आभा (ABHA) आईडी के कार्यों में प्रगति संतोषजनक न पाए जाने पर कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने परियोजना शहरी क्रमांक 7 के परियोजना अधिकारी श्री दिनेश मिश्रा और इंदौर ग्रामीण क्रमांक 1 के परियोजना अधिकारी श्री नितिन चौरसिया को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी आंगनवाड़ी केंद्र निर्धारित समय पर संचालित होकर पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ पहुँचाना सुनिश्चित करें।
